• स्ट्रेस ज़िंदगी का एक नॉर्मल हिस्सा है, पर बहुत ज़्यादा स्ट्रेस लेना — या अपने स्ट्रेस को ठीक से न संभालना — आपकी मेंटल और फ़िज़िकल हेल्थ पर असर डाल सकता है.
  • ख़ुशक़िस्मती से, स्ट्रेस कम करने के कुछ साइंस-बैक्ड तरीक़े बेहद आसान भी हैं — जैसे गहरी साँस लेना, एक्सरसाइज़, मेडिटेशन, और यहाँ तक कि झपकी लेना भी!
  • Oura पर अपने स्ट्रेस मैनेजमेंट टूल्स को टैग करें और देखें कि समय के साथ आपकी नींद, RHR और HRV कैसे बदल सकते हैं.

हर किसी को कभी-न-कभी स्ट्रेस महसूस होता ही है. स्ट्रेस एक नैचुरल (और कभी-कभी फ़ायदेमंद!) फ़िज़ियोलॉजिकल रिएक्शन है, जो आपके आस-पास की चुनौतियों से निपटने में आपकी मदद करता है. पर बहुत ज़्यादा स्ट्रेस (एक्यूट स्ट्रेस) या लगातार बना रहने वाला स्ट्रेस (क्रॉनिक स्ट्रेस) आपकी सेहत और ख़ुशी के लिए नुक़सानदेह हो सकता है.

2021 के एक पोल के मुताबिक़, दुनिया भर में 40% से ज़्यादा लोगों ने ख़ुद को परेशान या स्ट्रेस में महसूस करने की बात कही. इसका आपकी सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है. क्रॉनिक स्ट्रेस का जुड़ाव मेंटल और फ़िज़िकल दिक़्क़तों से है — हाइपरटेंशन और मेटाबॉलिक सिंड्रोम से लेकर डिप्रेशन और एंग्ज़ायटी तक. ख़ुशक़िस्मती से, यह ऐसी चीज़ है जिस पर आपका कुछ हद तक कंट्रोल होता है.

अच्छी बात क्या है?  ये 9 आदतें और ऐक्टिविटीज़ स्ट्रेस को कम कर सकती हैं और आपकी रिज़िलियंस को इतना बढ़ा सकती हैं कि जब स्ट्रेस आए, तो आप उसे संभाल सकें. इससे भी बेहतर?  ये सभी साइंस पर आधारित हैं.

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स्ट्रेस कम करने के 9 साइंस-बैक्ड तरीक़े

1. गहरी सांस लेने का एक्सरसाइज़ करें.

अपनी साँसों से अपने दिमाग़ का रुख़ बदलें. जब स्ट्रेस आप पर हावी होने लगे, तो गहरी साँस लेना बायोकेमिकली आपके स्ट्रेस और टेंशन को कम कर सकता है. सिर्फ़ पाँच मिनट की गहरी सांस भी स्ट्रेस कम करने और मूड बेहतर करने में कारगर पाई गई है. 

डायफ़्रामैटिक ब्रीदिंग और पेस्ड ब्रीदिंग जैसी ब्रीदिंग एक्सरसाइज़ साँस और ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम के बीच के जुड़ाव का फ़ायदा उठाती हैं. जान-बूझकर गहरी साँसें लेकर आप सिंपैथेटिक नर्वस सिस्टम (SNS) के एक्टिव होने (लड़ने या भागने वाले मोड) से निकल कर पैरासिंपैथेटिक (आराम और पचाने वाले) स्टेट में आ जाते हैं.

Oura मेंबर और न्यूरोसाइंटिस्ट Kaushik Ram, आराम और पचाने वाले मोड को ऐक्टिवेट करने के लिए वेगल ब्रीदिंग का इस्तेमाल करते हैं. Oura App में, Ram अपनी हार्ट रेट वेरिएबिलिटी (HRV) को ट्रैक करते हैं, जो पैरासिंपैथेटिक ऐक्टिवेशन का एक पैमाना है. उनकी कहानी यहाँ पढ़ें.

2. गाइडेड मेडिटेशन फ़ॉलो करें.

मेडिटेशन एक ऐसी प्रैक्टिस है जिसमें दिमाग़ को शांत किया जाता है. एक एवरेज इंसान के दिमाग़ में हर दिन 6,000 से ज़्यादा ख़याल आते हैं – तो स्ट्रेस महसूस होना तो लाज़मी है! हालाँकि आप अपने दिमाग़ को कभी पूरी तरह “बंद” तो नहीं कर सकते, पर मेडिटेशन उसके जितना क़रीब मुमकिन हो, वहाँ तक पहुँचने की कोशिश करता है. स्ट्रेस कम करने के लिए ख़ास तौर पर कारगर साबित हुई मेडिटेशन की कई स्टाइल्स हैं, जैसे मंत्र मेडिटेशन, योग निद्रा (या नॉन-स्लीप डीप रेस्ट), माइंडफ़ुलनेस, और ट्रान्सेंडेंटल मेडिटेशन.

Oura App पर कंटेंट एक्सप्लोर करें में आपको तरह-तरह के गाइडेड मेडिटेशन मिल जाएँगे. किसी सेशन के बाद, आपको तुरंत बायोफ़ीडबैक मिलता है, जिससे आप रियल-टाइम में देख पाते हैं कि आपकी बॉडी कैसे रिएक्ट कर रही है.

और भी जानें: गहरी और आरामदायक नींद के लिए Oura के गाइडेड स्लीप मेडिटेशन आज़माएं

3. पसीना बहाएं.

जब आप एक्सरसाइज़ करते हैं, तो आपकी बॉडी एंडॉर्फ़िन, न्यूरोट्रांसमीटर और ब्रेन-डिराइव्ड न्यूरोट्रॉफिक फ़ैक्टर (BDNF) जैसे दूसरे फ़ील-गुड मॉलिक्यूल रिलीज़ करती है. कई स्टडीज़ के मुताबिक़, ये बायोकेमिकल मूड एन्हांसर स्ट्रेस से असरदार तरीक़े से लड़ते हैं. केमिकल रिएक्शन के अलावा, फ़िज़िकल ऐक्टिविटी आपकी दबी हुई एनर्जी और टेंशन को निकालने का एक अच्छा रास्ता देती है, और आपका ध्यान स्ट्रेस देने वाली चीज़ों से हटा देती है. 

}जब सब कुछ हावी लगने लगे, तब एक्सरसाइज़ के लिए ख़ुद को तैयार करना मुश्किल हो सकता है. अच्छी खबर: एक स्टडी में पाया गया कि सिर्फ़ छह मिनट का हाई-इंटेंसिटी वर्कआउट भी BDNF बनाने के लिए काफ़ी है.

4. एक झपकी लें.

हो सकता है ख़राब नींद अकेले आपके स्ट्रेस की वजह न हो, पर यह उसे बढ़ाने में हाथ ज़रूर बँटाती है. जब आपकी नींद पूरी नहीं होती, तो आपका SNS एक्टिव हो जाता है. आपके कॉर्टिसोल और एड्रेनालिन का लेवल तेज़ी से बढ़ता है, और नतीजे में आपका स्ट्रेस और एंग्ज़ायटी भी बढ़ जाते हैं. 

10 से 30 मिनट की झपकी के लिए टाइमर सेट करें – इससे ज़्यादा हुआ तो हो सकता है आप उठने पर सुस्ती महसूस करें. अगर आपको दिन में झपकी लेने में दिक़्क़त होती है, तो कोई गाइडेड नॉन-स्लीप डीप रेस्ट सेशन आज़माएँ – इसमें जागते रहते हुए भी आपको एक झटपट झपकी के फ़ायदे मिल जाते हैं.

और पढ़ें: झपकी कितनी देर लेनी चाहिए?

5. कुछ समय नेचर/प्रकृति के बीच बिताएँ.

रिसर्च बार-बार दिखाती है कि नेचर का इंसान के मन पर सुकून देने वाला असर होता है. फ़ॉरेस्ट बाथिंग, अर्थिंग और इकोथेरेपी जैसी चीज़ें भले ही बिना किसी साइंस के लगें, पर इस बात के पक्के सबूत हैं कि ये स्ट्रेस कम करने में काम आती हैं.

नेचर के बीच समय बिताने से कॉर्टिसोल का लेवल कम हो सकता है और बार-बार एक ही बात सोचना (जो एंग्ज़ायटी की एक आम निशानी है) घट सकता है, मूड बेहतर हो सकता है, और आपका आराम और पचाने वाला सिस्टम ऐक्टिव हो सकता है.

इसके फ़ायदे पाने के लिए आपको जूते उतारने या किसी पेड़ को गले लगाने की ज़रूरत नहीं है. 10 मिनट की वॉक भी अगर किसी नैचुरल माहौल में हो, तो आपका स्ट्रेस कम कर सकती है.

6. कुछ मज़ेदार करें.

थोड़ा खुलकर जियो! भले ही आपकी टू-डू लिस्ट कभी ख़त्म न होती दिखे, पर थोड़ी देर का ब्रेक लेकर कोई ऐसा काम करना जो आपको अच्छा लगे, स्ट्रेस संभालने में मदद कर सकता है. जब स्ट्रेस होता है, तो उदास म्यूज़िक सुनने और मायूस कर देने वाली फ़िल्में देखने का मन कर सकता है. पर जान-बूझकर ख़ुद को ख़ुशनुमा चीज़ों की तरफ़ मोड़ने की कोशिश आपके स्ट्रेस लेवल और पूरे मूड पर ज़बरदस्त असर डाल सकती है.

7. अपने किसी क़रीबी से बात करें.

स्ट्रेस में ऐसा लग सकता है जैसे पूरी दुनिया का बोझ आपके कंधों पर आ गया हो. किसी दोस्त या फ़ैमिली मेंबर से बात करके अपने मन का बोझ हल्का करें. आप अपनी परेशानियाँ उनके साथ शेयर करें या न करें, बस किसी क़रीबी के साथ समय बिताना ही स्ट्रेस कम कर सकता है. दरअसल, स्टडीज़ में पाया गया है कि अच्छा सोशल सपोर्ट स्ट्रेस के लिए आपकी रिज़िलियंस बढ़ा देता है. यह कई रास्तों से होता है, जिनमें ऑक्सिटोसिन वाला रास्ता भी शामिल है — यानी आपका लव हार्मोन.

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8. कुछ नया सीखें.

अपने ऊपर और काम लादना भले ही उल्टा लगे, पर कुछ नया सीखना आपके अंदर काबिलियत और आत्म-सम्मान का एहसास जगाता है. इससे आप अपनी ज़िंदगी के स्ट्रेस भरे हालात को बेहतर तरीक़े से संभाल पाते हैं. साइकोलॉजी में इसे “ग्रोथ माइंडसेट” कहते हैं. ग्रोथ माइंडसेट स्ट्रेस देने वाली चीज़ों के सामने आपको ज़्यादा मज़बूत बना सकता है, और स्ट्रेस को देखने का आपका नज़रिया बदल सकता है.

9. ज़्यादा सेहतमंद खाना चुनें.

अगर स्ट्रेस में आपका हाथ चिप्स या आइसक्रीम की तरफ़ बढ़ जाता है, तो आप अकेले नहीं हैं — 27% बड़े मानते हैं कि वे स्ट्रेस में खाने लगते हैं. स्ट्रेस में रहने वाले लोगों के लिए खाना एक सहारा बन सकता है, ख़ासकर वो खाना जिसमें शुगर और फ़ैट ज़्यादा हो, जैसे पिज़्ज़ा और आइसक्रीम. बदक़िस्मती से, इन खानों का असर उल्टा पड़ सकता है, और ये स्ट्रेस को कम करने के बजाय और बढ़ा देते हैं. ये खाने आपके ब्लड शुगर में तेज़ी से उतार-चढ़ाव लाते हैं, जिसका असर एक-एक करके आपकी बॉडी के दूसरे हार्मोन पर भी पड़ता है – जैसे कॉर्टिसोल, यानी स्ट्रेस हार्मोन. 

इसके बजाय, ऐसे होल फ़ूड चुनें जिनसे इंसुलिन में अचानक स्पाइक न आए. मिसाल के लिए, सफ़ेद चावल की जगह ब्राउन राइस, या नाश्ते में शुगर वाले सीरियल की जगह ओटमील. इसके अलावा, कैफ़ीन और अल्कोहल से बचना अच्छा रहता है, क्योंकि ये भी आपके स्ट्रेस हार्मोन को ट्रिगर कर सकते हैं.

Oura के साथ स्ट्रेस को और बेहतर तरीक़े से संभालें

स्ट्रेस को अपने ऊपर हावी मत होने दें. असली बात यह है कि स्ट्रेस के जमा होने से पहले ही उससे निपट लें – इस तरह उसे संभालना आसान हो जाता है. आप जो भी टिप्स आज़माएँ, कोशिश करें कि कुछ हफ़्तों तक उन्हें लगातार करते रहें, ताकि आप उनका असर देख सकें. 

आप टैग फ़ीचर की मदद से Oura पर अपने स्ट्रेस मैनेजमेंट टूल्स को टैग कर सकते हैं. अपनी नई तकनीक को कुछ हफ़्ते या महीने आज़माने के बाद, आपको अपने Oura स्कोर में बदलाव दिखने लग सकते हैं. मिसाल के लिए, आपका स्ट्रेस बेहतर होने लग सकता है, आपकी आराम के समय हार्ट रेट (RHR) थोड़ी कम हो सकती है, और आपकी HRV बेहतर हो सकती है – यानी आपकी बॉडी स्ट्रेस को बेहतर तरीक़े से संभालना सीख रही है.

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