VO2 max, ओवरऑल कार्डियोवैस्कुलर हेल्थ का एक मार्कर है, जो मापता है कि एक्सरसाइज़ के दौरान आपकी बॉडी ऑक्सीजन को कितनी अच्छी तरह पहुँचाती और इस्तेमाल करती है. इससे आपको अंदाज़ा मिलता है कि फ़िज़िकल एंड्योरेंस और परफ़ॉर्मेंस के मामले में आपकी बॉडी कितनी दमदार है. 

लगातार फ़िज़िकल ऐक्टिविटी के दौरान आपकी बॉडी आपकी मसल्स तक जितनी बेहतर ऑक्सीजन पहुँचा पाएगी, आपका VO2 max उतना ही हाई होगा. 

अपना VO2 max बेहतर करना अपनी ओवरऑल कार्डियोवैस्कुलर हेल्थ और फ़िटनेस सुधारने के सबसे असरदार तरीक़ों में से एक है—और अपने एक्सरसाइज़ रूटीन में कुछ बदलाव करके यही किया जा सकता है. अपनी ट्रेनिंग में कुछ ख़ास तरह के कार्डियो वर्कआउट शामिल करके, आप धीरे-धीरे अपनी कार्डियो कैपेसिटी और अपनी पूरी सेहत, दोनों बेहतर कर सकती हैं.

मेंबर टिप: कार्डियो कैपेसिटी फ़ीचर से अपने VO2 max में हो रहे सुधार को ट्रैक करें, जो एक सबमैक्सिमल वॉकिंग टेस्ट के आधार पर आपके VO2 max का अंदाज़ा लगाता है. आपके VO2 max को चार लेवल में से किसी एक में रखा जाएगा: कम, ठीक-ठाक, हाई, या पीक. अपनी Oura Ring से मिली इस हेल्थ जानकारी का फ़ायदा उठाकर आप समय के साथ अपनी कार्डियोवैस्कुलर प्रोग्रेस पर नज़र रख पाते हैं.

और पढ़ें: अपनी कार्डियोवैस्कुलर हेल्थ बेहतर करने के 8 तरीक़े

VO2 Max क्यों मायने रखता है?

VO2 max सिर्फ़ एथलीट्स के लिए एक मीट्रिक नहीं है; यह हर किसी की ओवरऑल सेहत का एक अहम संकेत है. आपके हेल्थ गोल्स चाहे जो भी हों, VO2 max आपको यह समझने में मदद कर सकता है कि आपकी फ़िटनेस बेहतर हो रही है या नहीं, ऐसा Oura के डेटा साइंस एडवाइज़र और एक्सरसाइज़ फ़िज़ियोलॉजी एक्सपर्ट Marco Altini, PhD बताते हैं. 

मिसाल के लिए, ज़रा सोचिए — स्टोर से भारी सामान उठाकर घर लाना, हाइकिंग पर जाना, या अपने बच्चों या नाती-पोतों के साथ खेलना. “हाई VO2 max होने पर ये सारी ऐक्टिविटीज़ कम मेहनत में हो सकती हैं और ज़्यादा मज़ेदार भी लगती हैं,” Altini कहते हैं. 

VO2 max आपकी ओवरऑल हेल्थ, एनर्जी लेवल और बीमारी के ख़तरे का भी एक मज़बूत संकेत है. रिसर्च दिखाती है कि हाई VO2 max का जुड़ाव आगे चलकर कार्डियोवैस्कुलर बीमारी के कम ख़तरे से, अच्छी मेंटल हेल्थ से, बेहतर नींद की क्वालिटी से, और किसी भी वजह से मौत के घटे हुए ख़तरे से है.

VO2 Max कैसे बढ़ाएँ

अपना VO2 max बेहतर करने का सबसे अच्छा तरीक़ा एक्सरसाइज़ है. और अच्छी ख़बर यह है: रिसर्च दिखाती है कि इस मीट्रिक को ट्रेनिंग से काफ़ी हद तक बदला जा सकता है. 

कुल मिलाकर, कोशिश करें कि आप स्टेडी-स्टेट एरोबिक एक्सरसाइज़ के साथ बीच-बीच में थोड़ी ज़्यादा तेज़ ट्रेनिंग के इंटरवल भी मिलाकर करें. Altini समझाते हैं, “यह कॉम्बिनेशन—ज़्यादातर दिन साँस को रिलैक्स्ड रखना और हफ़्ते में करीब एक बार ज़्यादा ज़ोर लगाना—VO2 max बेहतर करने के लिए सबसे अच्छा लगता है.”

पर आपको कौन-सा ख़ास एक्सरसाइज़ प्रोग्राम अपनाना चाहिए, यह आपके फ़िटनेस लेवल के हिसाब से तय होता है. 

शुरुआती लोगों के लिए: लो-इंटेंसिटी एक्सरसाइज़ से शुरुआत करें (जैसे ज़ोन 2 ट्रेनिंग—इस पर आगे और बताया गया है). धीरे-धीरे हफ़्ते में एक बार इंटरवल ट्रेनिंग तक पहुँचें. 

इंटरमीडिएट या एक्सपीरियंस्ड लोगों के लिए: अगला लेवल पाने के लिए, आपके ट्रेनिंग प्लान में लो-से-मॉडरेट इंटेंसिटी वाली एरोबिक एक्सरसाइज़ के साथ हफ़्ते में एक-दो इंटरवल ट्रेनिंग सेशन होने चाहिए.

मेंबर टिप: जब कोई ऐक्टिविटी अपने-आप ट्रैक होती है या मैन्युअली शामिल की जाती है, तो अब Oura आपकी एवरेज हार्ट रेट और हार्ट रेट ज़ोन कैप्चर करता है. ऐक्टिविटी पूरी करने के बाद, आपको एक हार्ट रेट चार्ट दिखेगा और यह भी कि आपने छह हार्ट रेट ज़ोन में से हर एक में कितने मिनट बिताए.

स्टेप 1; अपने रूटीन में ज़ोन 2 ट्रेनिंग शामिल करें

Oura Ring पहने एक्सरसाइज़ बाइक पर बैठी महिला

ज़ोन 2 ट्रेनिंग का मतलब है हार्ट रेट ज़ोन 2 में की जाने वाली हल्की एक्सरसाइज़, जिसमें आपकी हार्ट रेट उसकी मैक्सिमम का करीब 60-70% होती है. इस तरह की हरकत, जिसमें जॉगिंग, तेज़ चलना, मॉडरेट साइकलिंग या हाइकिंग जैसी चीज़ें आती हैं, आपकी बॉडी को एनर्जी के लिए ऑक्सीजन का अच्छे से इस्तेमाल करने देती है.  

अपने पर्सनल “ज़ोन 2” कार्डियो को समझना बहुत ज़रूरी है, Altini बताते हैं. “जो अभी शुरुआत कर रहे हैं, वे आमतौर पर इस ज़ोन में धीमी रफ़्तार या कम पावर आउटपुट पर ट्रेनिंग करते हैं,” वे कहते हैं. “लेकिन एलीट एथलीट इसी थोड़ी कम इंटेंसिटी पर ज़्यादा फ़िज़िकल काम झेल सकते हैं.” 

Oura का ऑटोमैटिक ऐक्टिविटी डिटेक्शन फ़ीचर यह पता लगाने का आसान तरीक़ा देता है कि किस लेवल की एक्सरसाइज़ आपको ज़ोन 2 में लाती है. Oura के साथ कोई एक्टिविटी पूरी करने के बाद, आपको एक हार्ट रेट चार्ट दिखेगा और यह भी कि छह हार्ट रेट ज़ोन में से हर एक में आपने कितने मिनट बिताए.

ज़ोन 2 ट्रेनिंग को कैसे शामिल करें

हर हफ़्ते, 60 से 75 मिनट के दो-तीन ज़ोन 2 कार्डियो सेशन करने की कोशिश करें, यानी हफ़्ते में कुल 150 से 200 मिनट. जॉगिंग, तेज़ चाल, हाइकिंग, हल्की-मीडियम साइक्लिंग, स्विमिंग, रोइंग, या कोई ज़ोरदार विनयासा योगा क्लास — इनके बारे में सोच सकते हैं. 

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यह कैसे काम करता है

हालाँकि ज़ोन 2 ट्रेनिंग कुछ लोगों को आसान लग सकती है, लेकिन इस तरह की हरकत से आपकी सेहत को असली फ़ायदे मिलते हैं. Altini कहते हैं, “हर ट्रेनिंग इंटेंसिटी के अपने फ़ायदे हैं — बशर्ते उसे सही जगह इस्तेमाल किया जाए और किसी ख़ास मक़सद को ध्यान में रखकर की जाए.”

“जो लोग अभी शुरुआत कर रहे हैं और इस इंटेंसिटी पर ट्रेनिंग करते हैं, उनकी VO2 max के साथ-साथ उनका मेटाबॉलिक स्वास्थ्य भी बेहतर होगा,” Altini कहते हैं. “एडवांस्ड और एलीट एथलीट कम इंटेंसिटी वाली ट्रेनिंग से ज़्यादा ट्रेनिंग लोड जमा कर सकते हैं, वो भी कम कार्डियोवैस्कुलर स्ट्रेस और चोट के ख़तरे के साथ.”

ज़्यादा साइंटिफ़िक भाषा में कहें तो, ज़ोन 2 कार्डियो एरोबिक अडैप्टेशन, माइटोकॉन्ड्रियल डेवलपमेंट, ऑक्सीजन डिलीवरी और कैपिलरी डेंसिटी की नींव रखता है. इसीलिए, आप चाहे कितने भी सेहतमंद हों या ट्रेनिंग में कितने भी एडवांस्ड, ज़ोन 2 को शामिल करने से आपका दिल और फेफड़े को मज़बूती मिलेगी, और आगे चलकर VO2 max में ट्रेनिंग से जुड़े सुधारों के लिए बेस तैयार होगा.

स्टेप 2: इंटरवल ट्रेनिंग को शामिल करें

Oura Ring पहने एक्सरसाइज़ करता हुआ आदमी

जब कुछ हफ़्तों की लगातार ज़ोन 2 ट्रेनिंग से आपकी एक मज़बूत एरोबिक नींव बन जाए, तो अपने रूटीन में इंटरवल ट्रेनिंग जोड़ें.

इंटरवल ट्रेनिंग, जिसे अक्सर HIIT (हाई-इंटेंसिटी इंटरवल ट्रेनिंग) कहा जाता है, में हाई-इंटेंसिटी वाले बर्स्ट्स (जैसे ज़ोन 3 से 5) और लो-इंटेंसिटी वाली रिकवरी पीरियड्स — दोनों को बारी-बारी से किया जाता है. 

सबसे अच्छी बात? ज़्यादा कुछ करने की ज़रूरत नहीं है. हफ़्ते में सिर्फ़ एक इंटरवल ट्रेनिंग सेशन से भी काफ़ी फ़ायदे मिल जाते हैं. 2019 की एक मेटा-एनालिसिस में पाया गया कि VO2 max बेहतर करने के लिए सबसे बढ़िया इंटरवल ट्रेनिंग वो है जिसमें हफ़्ते में 1 से 2 बार HIIT वर्कआउट किया जाए — कम-से-कम चार हफ़्तों तक, और सबसे बढ़िया 12 हफ़्तों तक.

इंटरवल ट्रेनिंग को अपनी रूटीन में कैसे लाएँ

शुरुआती लोगों के लिए: अगर आप फ़िटनेस में नए हैं, तो धीरे-धीरे शुरू करें — Altini की यही सलाह है. आपका कार्डियोवैस्क्युलर सिस्टम तो जल्दी ढल जाता है, लेकिन आपकी मसल्स और टेंडन्स को किसी नए ट्रेनिंग रूटीन के हिसाब से ढलने में ज़्यादा वक़्त लगता है. चोट लगने का ख़तरा कम रखने के लिए, इंटेंसिटी को धीरे-धीरे बढ़ाएँ.

लेकिन एक बात पक्की है — मेहनत करेंगे तो नतीजे भी मिलेंगे: रिसर्च बताती है कि लो-इंटेंसिटी इंटरवल वर्कआउट्स भी — जो आपकी मैक्सिमम हार्ट रेट (MHR) के क़रीब 60% पर किए जाते हैं — कम एक्टिव लोगों की VO2 max बेहतर कर सकते हैं.

कैसे करें: हफ़्ते में एक इंटरवल ट्रेनिंग सेशन का टारगेट रखें. 20 सेकंड की हाई-इंटेंसिटी एक्सरसाइज़ करें, फिर 40 सेकंड आराम करें (एक जगह रुकें या हल्की हरकत कर सकते हैं). 5 बार दोहराएँ. यह आप ट्रेडमिल, ट्रैक, रोअर, या स्टेशनरी बाइक पर कर सकते हैं.

जो इंटरमीडिएट और एडवांस्ड लेवल पर एक्सरसाइज़ करते हैं, उनके लिए:

1. नॉर्वेजियन 4 x 4 प्रोटोकॉल

नॉर्वे के रिसर्चर्स ने जो प्रोटोकॉल तैयार किया है, उसके बारे में पाया गया है कि यह VO2 max को तेज़ी से बढ़ाता है. एक स्टडी में देखा गया कि ज्‍़यादा वज़न/ मोटापे वाले लोगों ने इस तरीक़े से सिर्फ़ छह हफ़्तों में अपनी VO2 max 10% तक बेहतर की.

कैसे करें: 4 मिनट की हाई-इंटेंसिटी एक्सरसाइज़ करें (MHR का 85-95%), फिर 3 मिनट की लो-इंटेंसिटी रिकवरी करें (MHR का 60-70%). 4 बार दोहराएँ.

2. लैक्टेट थ्रेशोल्ड इंटरवल ट्रेनिंग

लैक्टेट एनएरोबिक मेटाबॉलिज़्म से बनने वाला एक बाय-प्रोडक्ट है, जो तेज़ एक्सरसाइज़ के दौरान मसल्स में जमा होता जाता है. जब लैक्टेट लेवल बढ़ता है, तो यह इशारा होता है कि थकान शुरू हो रही है — और आप हाई-इंटेंसिटी वाला वर्कआउट ज़्यादा देर तक नहीं झेल पाते. 

लैक्टेट थ्रेशोल्ड ट्रेनिंग आपकी बॉडी को लैक्टेट ज़्यादा असरदार तरीक़े से साफ़ करने में बेहतर बना सकती है, जिससे आप हाई इंटेंसिटी को ज़्यादा देर तक बनाए रख सकते हैं. यह ट्रेनिंग ख़ासकर उन एथलीट्स के लिए फ़ायदेमंद है जिनकी फ़िटनेस की नींव मज़बूत हो — यह आपकी एंड्युरेंस और परफ़ॉर्मेंस को बढ़ाती है, क्योंकि जिस पॉइंट पर लैक्टेट जमा होकर एक्सरसाइज़ में ख़लल डालता है, वो पॉइंट देर से आता है.

कैसे करें: 10 मिनट की हाई-इंटेंसिटी एक्सरसाइज़ करें (अपनी MHR का 85-90% टारगेट रखें, जिसे लैक्टेट थ्रेशोल्ड भी कहते हैं). 3 मिनट आराम करें, और हल्की हरकत करते हुए अपनी हार्ट रेट को नीचे आने दें. 3 से 5 बार दोहराएँ.

यह कैसे काम करता है

इंटरवल ट्रेनिंग आपके कार्डियोवैस्क्युलर सिस्टम को ऑक्सीजन पहुँचाने और इस्तेमाल करने में ज़्यादा असरदार बनाकर VO2 max को बेहतर करती है. यह ऐसे होता है — यह उस चीज़ को बढ़ाती है जिसे स्ट्रोक वॉल्यूम कहते हैं — यानी आपके दिल की हर धड़कन के साथ ज़्यादा ख़ून पंप करने की काबिलियत. इससे ऑक्सीजन से भरा ख़ून आपकी मसल्स तक ज़्यादा असरदार तरीक़े से पहुँच पाता है.

स्टडीज़ दिखाती हैं कि 8-हफ़्ते का इंटरवल ट्रेनिंग प्रोग्राम स्ट्रोक वॉल्यूम को 10% तक बढ़ा सकता है, जिससे उसी एक्सरसाइज़ इंटेंसिटी पर हार्ट रेट कम हो जाती है. इसके अलावा, हाई-इंटेंसिटी इंटरवल ट्रेनिंग कार्डियक आउटपुट को बढ़ाती है, जिससे ओवरऑल ब्लड फ़्लो और ऑक्सीजन की सप्लाई बेहतर होती है. इसका नतीजा यह होता है कि आपकी मसल्स कैपिलरी डेंसिटी और माइटोकॉन्ड्रियल फ़ंक्शन बेहतर होने की वजह से ज़्यादा असरदार बन जाती हैं.


VO2 Max के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले सवाल-जवाब

VO2 max बेहतर करने के लिए हाई-इंटेंसिटी इंटरवल ट्रेनिंग (HIIT), मॉडरेट-इंटेंसिटी वाले स्टेडी-स्टेट कार्डियो से बेहतर है क्या?

ऐसा लगता है कि HIIT से VO2 max में ज़्यादा सुधार होता है. यूरोपीय जर्नल ऑफ़ प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी में छपी एक स्टडी में पाया गया कि कोरोनरी आर्टरी डिज़ीज़ वाले पेशेंट्स के साथ 10-हफ़्ते के ट्रायल के बाद, HIIT करने वालों की VO2 max 17.9% बढ़ी, जबकि मॉडरेट-इंटेंसिटी वाले ग्रुप की सिर्फ़ 7.9%.

हालाँकि, यह व्यक्ति पर भी निर्भर करता है. वैसे तो HIIT से VO2 max में ज़्यादा सुधार होते हैं, लेकिन यह बॉडी और मन दोनों पर भारी पड़ सकता है — जिससे बर्नआउट या चोट लगने का ख़तरा बढ़ जाता है. वहीं दूसरी तरफ़, लो-इंटेंसिटी एक्सरसाइज़ एक मज़बूत एरोबिक बेस बनाने में मदद करती है — जो लंबे समय की एंड्युरेंस और कार्डियोवैस्क्युलर सेहत के लिए ज़रूरी है — इसीलिए जो अभी शुरू कर रहे हैं या जिन्हें कोई ख़ास मेडिकल कंडीशन है, उनके लिए यह बेहतर ऑप्शन है.

VO2 Max बढ़ाने में कितना वक़्त लगता है?

VO2 max बेहतर करने में कितना वक़्त लगेगा — यह इस बात पर है कि आप कहाँ से शुरू कर रहे हैं. ज़्यादातर क्लिनिकल ट्रायल्स में लगातार ट्रेनिंग के 6 से 10 हफ़्तों के अंदर सुधार दिखता है. अगर Oura पर आपकी VO2 max ‘कम’ है, तो हो सकता है सिर्फ़ कुछ हफ़्तों में ही आपको बदलाव दिखने लगें. हालाँकि, अगर आप पहले से फ़िट हैं और आपकी VO2 max मॉडरेट या हाई है, तो सुधार दिखने में कुछ महीने लग सकते हैं — इसके लिए आपको नॉर्वेजियन 4 x 4 प्रोटोकॉल जैसे किसी हाई-इंटेंसिटी प्रोग्राम को फ़ॉलो करना होगा.


Oura एक्सपर्ट के बारे में

Marco Altini, PhD, के पास एप्लाइड मशीन लर्निंग में PhD cum laude, कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग में M.Sc. cum laude, और ह्यूमन मूवमेंट साइंसेज़ और हाई-परफ़ॉर्मेंस कोचिंग में M.Sc. cum laude की डिग्रियाँ हैं. उन्होंने फ़िज़ियोलॉजी, सेहत, टेक्नोलॉजी, और ह्यूमन परफ़ॉर्मेंस के बीच के क्षेत्र में 50 से ज़्यादा पेपर्स और पेटेंट्स पब्लिश किए हैं. वो HRV4 ट्रेनिंग के को-फ़ाउंडर हैं, Oura में एडवाइज़र हैं, VU एम्स्टर्डम में गेस्ट लेक्चरर हैं, और IEEE परवेसिव कंप्यूटिंग मैगज़ीन के एडिटर हैं. उन्हें दौड़ना पसंद है.