प्रेगनेंसी के नौ महीनों में बनने वाली मां की बॉडी में कई कमाल के बदलाव आते हैं. बढ़ते हुए बच्चे के हिसाब से बॉडी ख़ुद को ढालती है, तो नींद के पैटर्न और हेल्थ मार्कर भी बदलते हैं.
Oura की साइंस टीम ने एग्रीगेटेड और बिना पहचान वाला मेंबर डेटा देखकर यह समझने की कोशिश की कि प्रेगनेंट महिलाओं के बायोमेट्रिक मार्कर कैसे बदलते हैं. इस डेटा में मेंबर्स के हार्ट रेट, हार्ट रेट वेरिएबिलिटी (HRV), बॉडी टेम्परेचर और रेस्पिरेटरी रेट के ट्रेंड में साफ़ पैटर्न दिखे, जो मौजूदा रिसर्च से मेल खाते थे.
इन्हीं पैटर्न की मदद से Oura की डेटा, साइंस और प्रोडक्ट टीम ने Oura के साथ आपकी प्रेगनेंसी ट्रैक करने और उसे बेहतर समझने का एक नया तरीक़ा बनाया है: प्रेगनेंसी की जानकारी. इस नए फ़ीचर से आप ट्रैक कर सकती हैं कि आपकी प्रेगनेंसी कितनी आगे बढ़ चुकी है, यानी आपका जेस्टेशनल एज क्या है. साथ ही, हर हफ़्ते आपको उन फ़िज़ियोलॉजिकल बदलावों के बारे में अपडेट मिलेंगे, जो आप महसूस कर सकती हैं और अपने Oura डेटा में देख सकती हैं.
आगे जानें कि हर ट्राइमेस्टर में Oura मेंबर्स के डेटा से नींद और बायोमेट्रिक पैटर्न में क्या बदलाव दिखते हैं, इसमें “चौथा” ट्राइमेस्टर भी शामिल है.
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प्रेगनेंसी के दौरान आपकी बॉडी में क्या होता है?
कहने को तो बहुत कुछ! प्रेगनेंसी में आपकी बॉडी एक कमाल के बदलाव से गुज़रती है. आख़िर आपकी बॉडी में एक नई ज़िंदगी पल रही होती है.
जैसे-जैसे आपकी बॉडी बदलती है, Oura के बायोमेट्रिक्स भी बदलते हैं—यानी Oura से ट्रैक होने वाला फ़िज़ियोलॉजिकल डेटा, जिसमें आपका HRV, हार्ट रेट, रेस्पिरेटरी रेट और बॉडी टेम्परेचर के ट्रेंड शामिल हैं.
बच्चे की ग्रोथ को सपोर्ट करने के लिए आपकी बॉडी में जो बदलाव आते हैं, उनका सीधा असर इन बायोमेट्रिक्स पर पड़ता है. जैसे, ब्लड वॉल्यूम, कार्डियक आउटपुट और मेटाबॉलिक रेट बढ़ने से आपके हार्ट रेट और बॉडी टेम्परेचर में बदलाव आते हैं.
“याद रखें, प्रेगनेंसी के दौरान आपके वाइटल्स में रोज़ छोटे-मोटे बदलाव आते रहेंगे,” ऐसा कहना है Neta Gotlieb, PhD का, जो Oura में विमेंस हेल्थ प्रोडक्ट मैनेजर और क्लिनिकल रिसर्च साइंटिस्ट हैं. “और ये पूरी तरह नॉर्मल है! प्रेगनेंसी में हर दिन अलग लग सकता है, अलग महसूस हो सकता है — लेकिन लॉन्ग-टर्म ट्रेंड्स से आपको ज़्यादा साफ़ अंदाज़ा मिलेगा कि एक नई ज़िंदगी को अपने अंदर पालते हुए आपकी बॉडी में क्या-क्या बदल रहा है.”
| मेंबर टिप: अपने Oura App में ट्रेंड्स व्यू से देखें कि प्रेगनेंसी के दिनों, हफ़्तों और महीनों में आपके बायोमेट्रिक्स में क्या-क्या बदलाव आ रहे हैं. |
पहला ट्राइमेस्टर
नींद में बदलाव
पहले ट्राइमेस्टर में रात को ज़्यादा वक़्त जागे रहना और बार-बार नींद खुलना आम बात है. लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि आप असल में कम सो रही हैं.
बल्कि, Oura के मेंबर डेटा से पता चलता है कि पहले ट्राइमेस्टर में कुल नींद औसतन क़रीब 20 मिनट बढ़ जाती है. क्यों? “ऐसा इसलिए है क्योंकि वो बिस्तर पर ज़्यादा वक़्त बिता रही होती हैं,” Gotlieb बताती हैं.
पहले ट्राइमेस्टर में Oura मेंबर्स के डेटा में दिखने वाले पैटर्न
| बायोमैट्रिक | बदलाव |
| बॉडी टेम्परेचर ट्रेंड | कंसीव करने के फ़ौरन बाद बढ़ जाता है |
| रेस्पिरेटरी रेट | बढ़ती है |
| हार्ट रेट | कंसीव करने के बाद तेज़ी से बढ़ती है, फिर थोड़ी कम हो जाती है |
| HRV | कंसीव करने के बाद गिरती है, फिर बढ़ती है |
और क्या-क्या उम्मीद करें
- दिन में नींद आना: प्रोजेस्टेरोन यूटरस की लाइनिंग को बनाए रखने में बहुत अहम रोल निभाता है, ताकि एम्ब्रियो सही से इम्प्लांट हो सके और शुरुआती डेवलपमेंट हो सके. लेकिन इस हार्मोन के तेज़ी से बढ़ने का एक सेडेटिव असर भी होता है, जिससे दिन में नींद आती रहती है.
- बार-बार पेशाब आना: एस्ट्रोजन का लेवल बढ़ता है, जिससे बॉडी को ज़्यादा ब्लड बनाने में मदद मिलती है. इसकी वजह से आपको ज़्यादा प्यास लग सकती है और बार-बार पेशाब जाने की ज़रूरत पड़ सकती है — जो आपकी नींद में ख़लल डाल सकती है.
- “मॉर्निंग” सिकनेस: पहले ट्राइमेस्टर में 80% तक महिलाओं को जी मिचलाना या उल्टी आती है. नाम भले ही मॉर्निंग सिकनेस है, लेकिन ये दिन या रात कभी भी हो सकती है. एक स्टडी में पाया गया कि जिन महिलाओं को जी मिचलाना या उल्टी होती है, उनकी रात में बार-बार नींद खुलती है, दिन में थकान रहती है, सुबह जल्दी नींद खुल जाती है, और सोने में भी दिक़्क़त होती है.
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| मेंबर स्टोरी: अपनी दूसरी प्रेगनेंसी के दौरान, Laura ने Oura का सहारा लिया — प्रेगनेंसी को डिटेक्ट करने, अपने एक्टिव दिनों की प्लानिंग करने, और अपनी बॉडी को और अच्छे से समझने के लिए. |
दूसरा ट्राइमेस्टर
नींद में आने वाले बदलाव
दूसरे ट्राइमेस्टर में भी रात को बार-बार नींद खुलने का सिलसिला जारी रहता है. Oura के डेटा से पता चलता है कि कुल नींद थोड़ी कम हो जाती है, और एस्ट्रोजन का लेवल बढ़ने की वजह से कई मेंबर्स ज़्यादा वक़्त REM स्लीपमें बिताती हैं.
दूसरे ट्राइमेस्टर में Oura मेंबर्स के डेटा में दिखने वाले पैटर्न
| बायोमैट्रिक | बदलाव |
| बॉडी टेम्परेचर ट्रेंड | कम होता है |
| रेस्पिरेटरी रेट | कम होता है |
| हार्ट रेट | लगातार ऊपर चढ़ता है |
| HRV | धीरे-धीरे कम होती है |
और क्या-क्या उम्मीद करें
- एनर्जी में ज़्यादा ठहराव: दूसरे ट्राइमेस्टर में भी आपके हार्मोन्स बदल रहे होते हैं, लेकिन पहले और तीसरे के मुक़ाबले उतने तेज़ी से नहीं — इसलिए आपकी एनर्जी बेहतर हो सकती है. हो सकता है दिन में झपकियाँ कम आएँ, और रात को सोना भी आसान लगे.
- आराम से लेटने में दिक़्क़त: रिलैक्सिन एक हार्मोन है जो प्रेगनेंसी की शुरुआत में रिलीज़ होता है, और दूसरे ट्राइमेस्टर की शुरुआत में अपने पीक पर पहुँचता है. जैसा नाम से ही पता चलता है, रिलैक्सिन पेल्विस के लिगामेंट्स और टिशूज़ को नरम करता है, ताकि डिलीवरी आसान हो सके और हिप्स बाहर की तरफ़ खुल सकें. जोड़ों की इस बढ़ी हुई फ़्लेक्सिबिलिटी की वजह से दर्द और बेचैनी हो सकती है, ख़ासकर रात में.
- बहुत साफ़ सपने: सपने REM स्लीप में आते हैं, जो दूसरे ट्राइमेस्टर में एस्ट्रोजन के बढ़ते लेवल की वजह से बढ़ सकती है. कभी-कभी बुरे सपने आपकी नींद ख़राब कर सकते हैं, लेकिन सपने आने के फ़ायदे भी हैं — इनसे आप अपनी भावनाओं को संभाल पाती हैं, और स्ट्रेस भी कम होता है.
तीसरा ट्राइमेस्टर
नींद में बदलाव
Oura के मेंबर डेटा के हिसाब से, तीसरे ट्राइमेस्टर तक जागने का वक़्त औसतन क़रीब 10 मिनट और बढ़ सकता है — जिससे कुल नींद कम हो जाती है.
तीसरे ट्राइमेस्टर में Oura मेंबर्स के डेटा में दिखने वाले पैटर्न
| बायोमैट्रिक | बदलाव |
| बॉडी टेम्परेचर ट्रेंड | ज़्यादातर समय एक-सा रहता है, लेकिन डिलीवरी से ठीक पहले बढ़ जाता है. |
| रेस्पिरेटरी रेट | काफ़ी हद तक एक-सा रहता है. |
| हार्ट रेट | लगातार बढ़ता रहता है, लेकिन डिलीवरी से कुछ हफ़्ते पहले थोड़ा कम हो जाता है |
| HRV | लगातार कम होता रहता है, फिर डिलीवरी से कुछ हफ़्ते पहले थोड़ा बढ़ जाता है |
और क्या हो सकता है
नींद आने में दिक़्क़त: करीब 64% बनने वाली माओं को तीसरे ट्राइमेस्टर में इंसोम्निया होता है, जबकि 98% महिलाएं बताती हैं कि रात में उनकी नींद ज़्यादा बार खुलती है. नींद पूरी न होने से दिन में आपके मूड और एनर्जी पर असर पड़ सकता है.
- स्ट्रेस और एंग्ज़ायटी बढ़ना: एक स्टडी में पाया गया कि तीसरे ट्राइमेस्टर में 88% महिलाओं को डिलीवरी को लेकर कुछ हद तक एंग्ज़ायटी होती है. इसे कम करने के लिए ब्रीथवर्क या मेडिटेशन जैसी स्ट्रेस कम करने वाली आदतें अपनी रूटीन में शामिल करें. हाल की रिसर्च में Oura और Headspace की मदद से पाया गया कि ये तरीक़े आम एंग्ज़ायटी और प्रेगनेंसी से जुड़ी एंग्ज़ायटी, दोनों को कम कर सकते हैं.
- “नेस्टिंग” और आने वाले पल का इंतज़ार: प्रेगनेंसी में “नेस्टिंग” का मतलब है बच्चे के आने से पहले घर और आसपास की चीज़ों को तैयार करने की नेचुरल इच्छा, जो तीसरे ट्राइमेस्टर में सबसे ज़्यादा होती है. इस इंतज़ार और एक्साइटमेंट की वजह से आपको ज़्यादा एनर्जी महसूस हो सकती है, लेकिन ख़ुद को याद दिलाती रहें कि बीच-बीच में ब्रेक भी लें और ज़्यादा ज़ोर न लगाएँ!
“चौथा ट्राइमेस्टर”
नींद में बदलाव
Oura मेंबर्स के डेटा के मुताबिक, बच्चे के जन्म के बाद कुल नींद धीरे-धीरे फिर बढ़ने लगती है—यह अच्छी ख़बर है! लेकिन डिलीवरी के आसपास और उसके तुरंत बाद जागने का समय काफ़ी बढ़ जाता है.
Oura मेंबर्स के डेटा में डिलीवरी के बाद के पैटर्न
| बायोमैट्रिक | बदलाव |
| बॉडी टेम्परेचर ट्रेंड | डिलीवरी के बाद कम हो जाता है. |
| रेस्पिरेटरी रेट | कम हो |
| हार्ट रेट | कम हो |
| HRV | बढ़ता है |
और क्या-क्या उम्मीद करें
- 24/7 बच्चे की देखभाल: जन्म के बाद शुरुआती कुछ हफ़्तों तक बच्चे को हर दो से चार घंटे में दूध पिलाना पड़ता है. दूध पिलाने के बाद नए पेरेंट्स के लिए बच्चे को दोबारा सुलाना या ख़ुद फिर से सो पाना भी मुश्किल हो सकता है! इन सब वजहों से नए पेरेंट्स को कम नींद मिलती है.
- हार्मोन लेवल कम होने की वजह से मूड में बदलाव: डिलीवरी के बाद एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन का लेवल अचानक गिर जाता है, जिसका असर आपके मूड और मोटिवेशन पर पड़ता है. इसकी वजह से कुछ नई माँओं को उदासी, चिड़चिड़ाहट, एंग्ज़ायटी, या सुस्ती महसूस हो सकती है. हार्मोन लेवल में ये बदलाव रात में पसीना आने और डिलीवरी के बाद इंसोम्नियाकी वजह भी बन सकते हैं. अगर ये परेशानियां बढ़ने लगें और कुछ हफ़्तों से ज़्यादा रहें, तो अपने मेडिकल प्रोवाइडर से बात करें.
- बच्चे से जुड़ने का वक़्त: बच्चे के आने के बाद कई पेरेंट्स अपने बच्चे से जुड़ने के लिए स्किन-टू-स्किन कॉन्टैक्ट, कॉन्टैक्ट नैप्स या ब्रेस्टफ़ीडिंग करते हैं. इनसे पेरेंट और बच्चे, दोनों की बॉडी में ऑक्सिटोसिन रिलीज़ होता है, जिसे लव हार्मोन भी कहा जाता है.
- नई चीज़ों के साथ तालमेल बिठाने के तरीके: ये सारे बदलाव भारी लग सकते हैं, ख़ासकर पहली बार पेरेंट बनने वालों के लिए. Gotlieb कहती हैं कि इसलिए जब भी हो सके, मदद और सपोर्ट मांगना बहुत ज़रूरी है. अगर पड़ोसी डिनर लाने की पेशकश करे, तो उसे स्वीकार करें. जब आप झपकी लें, तो अपने पार्टनर से कपड़े तह करने को कहें और दूसरे नए पेरेंट्स के सपोर्ट ग्रुप से जुड़ें.
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हर ट्राइमेस्टर में बायोमेट्रिक ट्रेंड कैसे बदलते हैं
हार्ट रेट में उतार-चढ़ाव
आम तौर पर कंसेप्शन के बाद HRV कम होता है, फिर पहले ट्राइमेस्टर में थोड़ा बढ़ता है. इसके बाद HRV लगातार कम होता रहता है और डिलीवरी से कुछ हफ़्ते पहले थोड़ा बढ़ जाता है.
हार्ट रेट
आम तौर पर कंसेप्शन के बाद हार्ट रेट अचानक बढ़ता है, फिर थोड़ा कम होता है. इसके बाद यह लगातार बढ़ता रहता है और डिलीवरी से कुछ हफ़्ते पहले फिर थोड़ा कम हो जाता है.
रेस्पिरेटरी रेट
आम तौर पर पहले ट्राइमेस्टर में रेस्पिरेटरी रेट बढ़ता है और दूसरे ट्राइमेस्टर में कम होता है. तीसरे ट्राइमेस्टर में कम हुआ रेस्पिरेटरी रेट आम तौर पर काफ़ी हद तक एक-सा रहता है.
टेम्परेचर ट्रेंड
कंसेप्शन के बाद पहले ट्राइमेस्टर में बॉडी टेम्परेचर ट्रेंड आम तौर पर बढ़ते हैं. दूसरे ट्राइमेस्टर में ये आम तौर पर कम होते हैं, फिर तीसरे ट्राइमेस्टर में काफ़ी हद तक एक-से रहते हैं और डिलीवरी से ठीक पहले अचानक बढ़ जाते हैं.
Oura एक्सपर्ट के बारे में
Neta Gotlieb, PhD, Oura में प्रोडक्ट मैनेजर हैं और पहले लीड क्लिनिकल रिसर्च साइंटिस्ट रह चुकी हैं. वह महिलाओं की हेल्थ पर फ़ोकस करने वाले सॉल्यूशन पर रिसर्च और उन्हें डेवलप करने का काम करती हैं. डॉ. Gotlieb ने Tel Aviv University से बायोलॉजिकल साइकोलॉजी में मास्टर्स किया, जहां उन्होंने स्ट्रेस का इम्यून सिस्टम और एंडोक्राइन सिस्टम पर असर समझने पर काम किया. इसके बाद उन्होंने UC Berkeley से PhD की, जहां उन्होंने रिप्रोडक्टिव न्यूरोएंडोक्रिनोलॉजी और सर्केडियन रिदम का मेंस्ट्रुअल साइकल, प्रेगनेंसी और बच्चे के जन्म पर असर समझने के लिए रिसर्च की. उन्हें Women in Tech का ग्लोबल टेक्नोलॉजी लीडरशिप अवॉर्ड और Women of Wearables की तरफ़ से Women’s Health और FemTech में ट्रेलब्लेज़िंग लीडर के सम्मान से नवाज़ा जा चुका है.










