प्रेगनेंट हैं और नींद नहीं आ रही? ख़ुद को अकेला नहीं पाएं. 80% तक महिलाएं बताती हैं कि प्रेगनेंसी के दौरान उन्हें सोने में दिक़्क़त होती है. हालांकि यह आसान नहीं होता, लेकिन अपनी कुछ आदतें बदलकर, सोने का माहौल बेहतर बनाकर और सोने की पोज़िशन बदलकर आप प्रेगनेंसी में बेहतर नींद ले सकती हैं.
आगे जानिए, हर ट्राइमेस्टर में बेहतर नींद के लिए एक्सपर्ट्स के सुझाए हुए सबसे असरदार टिप्स और प्रेगनेंसी में नींद से जुड़े आम सवालों के जवाब
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प्रेगनेंसी के दौरान अच्छी नींद क्यों ज़रूरी है
जब प्रेगनेंसी की वजह से आप पहले की तरह अपने रोज़मर्रा के काम नहीं कर पातीं, तो मन टूट सकता है,” बोर्ड-सर्टिफ़ाइड OBGYN Christine Noa Sterling, MD कहती हैं. “लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान कई बार दिन भर में सबसे ज़रूरी काम आराम करना ही होता है.”
प्रेगनेंसी के दौरान नींद आपकी सेहत और बच्चे के विकास, दोनों के लिए बहुत ज़रूरी होती है. “इस समय आपकी बॉडी पहले से कहीं ज़्यादा मेहनत कर रही होती है, इसलिए अच्छी नींद भी पहले से कहीं ज़्यादा ज़रूरी हो जाती है,” डॉक्टर. Sterling.
प्रेगनेंसी के दौरान आपकी बॉडी पर पड़ने वाला अतिरिक्त दबाव, जैसे मेटाबॉलिज़्म तेज़ होना और ब्लड वॉल्यूम बढ़ना, थकान बढ़ा देता है. नींद हार्मोन को संतुलित रखने में मदद करती है. इनमें hCG (ह्यूमन कोरियोनिक गोनाडोट्रोपिन) और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन शामिल हैं, जो हेल्दी प्रेगनेंसी के लिए बेहद ज़रूरी हैं.
अच्छी नींद प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली कुछ दिक़्क़तों का ख़तरा भी कम कर सकती है. “प्रेगनेंसी के दौरान नींद पूरी न होने से हाई ब्लड प्रेशर, जेस्टेशनल डायबिटीज़, बच्चे के जन्म के बाद डिप्रेशन और एंग्ज़ायटी का ख़तरा बढ़ सकता है. साथ ही, नॉर्मल डिलीवरी की संभावना भी कम हो सकती है,” डॉक्टर. Sterling. पूरी प्रेगनेंसी के दौरान भरपूर आराम करना आपके और आपके बच्चे, दोनों के लिए ज़रूरी है.
और पढ़ें: Oura सदस्य डेटा के हिसाब से, प्रेगनेंसी के दौरान आपकी बॉडी में क्या होता है
हर ट्राइमेस्टर में बेहतर नींद कैसे लें
पहला ट्राइमेस्टर
आपका बच्चा हर दिन बढ़ रहा है और आपकी बॉडी भी तेज़ी से इस बदलाव के हिसाब से ढल रही है. इसका मतलब है कि आपकी बॉडी और हार्मोन में काफ़ी बदलाव होते हैं, जिनका असर आपकी नींद, मूड और एनर्जी लेवल पर पड़ सकता है.
- जब भी मौका मिले झपकी लें: अगर हो सके, तो जब प्रोजेस्टेरोन की वजह से थकान महसूस होने लगे, दिन में थोड़ी देर की झपकी लेना शुरू करें हर दिन सिर्फ़ 15 मिनट की झपकी भी आपकी पूरी सेहत बेहतर करने में मदद कर सकती है,” Oura में वीमेन हेल्थ प्रोडक्ट मैनेजर, Neta Gotlieb, PhD कहती हैं. “जो लोग आदतन झपकी लेते हैं, वे कम स्ट्रेस और कम एंग्ज़ायटी महसूस करते हैं.
- सोते समय अपने वक़्त का ज़्यादा से ज़्यादा फ़ायदा उठाएँ: रात में बार-बार नींद खुलने की भरपाई के लिए थोड़ा जल्दी सोने की कोशिश करें. “जब स्लीप एफ़िशिएंसी कम हो जाती है, तो बिस्तर पर थोड़ा ज़्यादा समय बिताने की प्लानिंग करना मददगार होता है,” डॉक्टर Gotlieb. “इससे आपके लिए अपनी तय नींद पूरी करना आसान हो जाता है”
| मेंबर टिप: आपके स्लीप स्कोर के निचे, स्लीप एफ़िशिएंसी कंट्रीब्यूटर पर एक नज़र डालें , यह बताता है कि बिस्तर पर बिताए समय में आप कितनी देर सोए. |
पानी पीते रहें मतली और उल्टी होने के साथ-साथ बढ़ते बच्चे के लिए आपकी बॉडी ज़्यादा ब्लड भी बना रही होती है. इसकी वजह से डिहाइड्रेशन हो सकता है. दिन भर पानी पीती रहें और अगर बार-बार उल्टी हो रही है, तो इलेक्ट्रोलाइट्स लेने की कोशिश करें. डिहाइड्रेशन की वजह से नींद की क्वालिटी भी ख़राब हो सकती है.
- रात में थोड़ा-थोड़ा पिएं: अगर रात में प्यास लगे, तो एक साथ बहुत सारा पीने के बजाय थोड़ा-थोड़ा पिएं. आप कितनी तेज़ी से पीती हैं, उसका असर इस बात पर पड़ सकता है कि आपको कितनी बार पेशाब जाना पड़े.
- कम मात्रा में खाना और स्नैक्स लें: तीन बार ज़्यादा खाने के बजाय, थोड़ी-थोड़ी मात्रा में बार-बार खाने से मतली, सीने में जलन और पेट की दिक़्क़त कम हो सकती है. डॉ. Gotlieb आगे कहती हैं, “सोने से पहले हल्का स्नैक लेने से मतली की वजह से नींद में पड़ने वाली रुकावट भी कम हो सकती है.”
- मतली से राहत दिलाने वाले विटामिन आजमाएं: }“अगर प्रेगनेंसी में होने वाली मतली आपकी नींद पर असर डाल रही है, तो आप रात में स्लीप-एड ले सकती हैं.* साथ ही, अपनी रोज़ की रूटीन में विटामिन B6 और अदरक शामिल करने के बारे में भी सोचें. ये मतली को दूर रखने में मदद कर सकते हैं,” डॉ. Sterling.
*कोई भी नया सप्लीमेंट्स शुरू करने से पहले हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह लें.
दूसरा ट्राइमेस्टर
इस दौरान कई महिलाओं को ज़्यादा एनर्जी महसूस हो सकती है, प्रेगनेंसी में होने वाली मतली कम हो सकती है और प्यारा-सा बेबी बंप भी दिखने लगता है. फिर भी आपकी नींद पर असर पड़ सकता है, इसलिए इन टिप्स का ध्यान रखें.{
- दिन में एक्सरसाइज़ करें: अगर दूसरे ट्राइमेस्टर में आप एनर्जेटिक महसूस कर रही हैं, तो अपनी आम वॉक या वर्कआउट के साथ एक्टिव रहें. रेगुलर एक्सरसाइज़ से जेस्टेशनल डायबिटीज़ और प्रीक्लेम्पसिया का ख़तरा कम हो सकता है, लेबर का समय कम हो सकता है, और यह आपको बेहतर नींद लेने में भी मदद कर सकती है.
| मेंबर टिप: Oura आपके स्टेप्स और एक्टिविटी ट्रैक करके एक्टिव रहने में मदद करता है—और हर तरह की मूवमेंट मायने रखती है! इसके अलावा, आप अपनी प्रेगनेंसी के दौरान जैसा महसूस कर रही हैं, उसके हिसाब से अपने एक्टिविटी गोल मैन्युअली बदल सकती हैं. |
- प्रेगनेंसी पिलो (तकिया) इस्तेमाल करें: प्रेगनेंसी पिलो को बढ़ती हुई बॉडी को सपोर्ट देने के लिए बनाया गया है. “महिलाएं बताती हैं कि पेट के नीचे, घुटनों के बीच और पीठ के पीछे तकिया लगाने से पीठ दर्द में आराम मिलता है. इससे मसल्स को सपोर्ट मिलता है और बढ़े हुए वज़न का दबाव कम महसूस होता है, डॉक्टर Gotlieb.
- }कैफ़ीन से बचें: दूसरे ट्राइमेस्टर में थोड़ी मात्रा में कैफ़ीन ले सकती हैं, लेकिन हो सकता है अब आपकी बॉडी उस पर पहले से ज़्यादा रिएक्ट करे. ऐसा इसलिए है क्योंकि दूसरे ट्राइमेस्टर तक आपकी बॉडी को कैफ़ीन बाहर निकालने में लगभग दोगुना समय लगने लगता है. एक स्टडी में पाया गया कि प्रेगनेंसी के बाद वाले हिस्से में कैफ़ीन की हाफ़-लाइफ़ 2.5–4.5 घंटे से बढ़कर 15 घंटे हो जाती है.
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तीसरा ट्राइमेस्टर
अब बस थोड़ा और! जल्द ही आप अपने बच्चे से मिलने वाली हैं, लेकिन उससे पहले नींद के मामले में कुछ मुश्किल हफ़्ते आ सकते हैं. कई महिलाओं को सोते समय पीठ दर्द और असहजता महसूस होती है, जिससे नींद बार-बार टूट सकती है. बच्चे से मिलने की एक्साइटमेंट और डिलीवरी को लेकर घबराहट भी आपको जगाए रख सकती है!
- अपनी नींद की आदतें सही रखें: बेहतर नींद के लिए कुछ आदतें मदद कर सकती हैं, जैसे सोने से कम से कम एक घंटा पहले ब्लू लाइट से बचना, शाम को लाइट धीमी रखना, स्ट्रेस बढ़ाने वाली चीज़ोंसे दूर रहना (जैसे डरावनी फ़िल्में!) और कमरे को ठंडा रखना. “अगर रात में नींद खुल जाए, तो स्क्रीन या ब्लू लाइट से बचें, लाइट बंद रखें और इसकी जगह रेड लाइट इस्तेमाल करें. मोशन से ऑन होने वाली लाइट्स भी मिलती हैं, जो काफ़ी काम की हैं Gotlieb कहती हैं.
- स्ट्रेस को कंट्रोल में रखने की कोशिश करें: बच्चे के आने से पहले थोड़ा ज़्यादा स्ट्रेस महसूस होना बिल्कुल आम है. लेकिन इसका असर आपकी नींद पर उल्टा पड़ सकता है: स्ट्रेस नींद पर असर डालता है, और नींद पूरी न होने से स्ट्रेस और बढ़ जाता है! स्ट्रेस कम करने के लिए डॉक्टर Sterling की सलाह है कि अपने बच्चे से कनेक्ट होने के लिए उससे बात करें, सोशल मीडिया से ब्रेक लें और हर दिन 15–20 मिनट सिर्फ़ अपनी चिंताओं के बारे में सोचने और उनके सॉल्यूशन ढूंढने के लिए रखें, ताकि एक ही बात बार-बार दिमाग़ में न चलती रहे.
| मेंबर टिप: Oura ऐप के गाइडेड मेडिटेशन या ब्रीदिंग एक्सरसाइज़ को Explore कंटेंट में फ़ॉलो करें या स्ट्रेस कम करने के इन साइंस-बैक्ड तरीक़ों को आज़माएं. |
- तकियों के साथ बाईं करवट सोएं: रिसर्च से पता चला है कि तीसरे ट्राइमेस्टर में बाईं करवट सोना एक अच्छी स्लीपिंग पोज़िशन है. इस पोज़िशन से ब्लड फ़्लो बेहतर होता है, इसलिए यह ज़्यादा आरामदायक लग सकती है. पैरों के बीच तकिया रखने से पेल्विस को सपोर्ट मिलता है. कमर के पीछे और पेट के नीचे तकिया रखने से दबाव भी कम हो सकता है.
डिलीवरी के बाद बेहतर नींद के टिप्स

- अपने बिस्तर के पास पानी और नाश्ता रख लें: ब्रेस्टफ़ीडिंग कराने वाली माओं को दूध बनने की वजह से ज़्यादा प्यास और भूख लग सकती है. इसलिए मिल्क सप्लाई बनाए रखने के लिए हर कुछ घंटों में कुछ न कुछ खाने की कोशिश करें.
- मदद मांगने से न झिझकें: “डिलीवरी के बाद का समय काफ़ी मुश्किल हो सकता है और ज़्यादातर लोगों को बच्चे के जन्म के बाद पूरी मदद या मेडिकल केयर नहीं मिलती,” डॉ. Sterling. “अगर आपके पास पार्टनर, दोस्त या परिवार है, तो उनसे थोड़ी और मदद मांगने में झिझकें नहीं.”
डॉ. Gotlieb आगे कहती हैं, “लोग आम तौर पर मदद करना चाहते हैं, लेकिन उन्हें समझ नहीं आता कि कैसे. इसलिए साफ़-साफ़ बताने से बेहतर मदद मिल सकती है. जैसे, किसी से कपड़े वॉशिंग मशीन में डालने या बर्तन धोने के लिए कहें.” - जब भी मौका मिले झपकी लें: अगर आपने प्रेगनेंसी के दौरान दिन में सोने की आदत नहीं डाली है, तो झपकी लेना थोड़ा अजीब लग सकता है. लेकिन बच्चे के साथ रात भर जागने के बाद आपको इसकी ज़रूरत पड़ेगी! जब आपका नवजात बच्चा सोए, उसी समय आप भी झपकी लेने की कोशिश करें, ताकि आप दोनों एक साथ सो सकें. डॉ. Gotlieb की सलाह है. “इससे आपकी एनर्जी थोड़ी वापस आ सकती है और बच्चे की दूसरी झपकियों के दौरान आपको घर के काम या नहाने जैसी दूसरी ज़िम्मेदारियां पूरी करने का समय मिल सकता है.”
और पढ़ें: नई रिसर्च: Oura की मदद से पता लगाया जा सकता है कि लेबर ड्यू डेट से पहले शुरू होगी या बाद में
प्रेगनेंसी में नींद से जुड़े आम सवाल
प्रेगनेंसी के दौरान नींद का अनुभव पहले से काफ़ी अलग हो सकता है. प्रेगनेंसी में नींद को लेकर सबसे ज़्यादा पूछे जाने वाले कुछ सवाल यहां दिए गए हैं.
क्या प्रेगनेंसी में मैं पीठ के बल सो सकती हूं?
शुरुआती स्टडीज़ से पता चलता है कि पीठ के बल या दाईं करवट सोने से स्टिल बर्थ, बच्चे की ग्रोथ धीमी होने, कम जन्म वज़न और प्रीक्लेम्पसिया का ख़तरा बढ़ सकता है. थ्योरी ये थी कि यूटरस का बढ़ता वज़न एक ऐसी बड़ी आर्टरी और नस पर दबाव डालता है, जो यूटरस और फ़ीटस तक ब्लड और ऑक्सीजन पहुँचाती है.
हालांकि, 2019 की एक स्टडी जिसमें 8,000 से ज़्यादा महिलाओं का डेटा देखा गया, उसमें पाया गया कि प्रेगनेंसी के 30 हफ़्तों तक पीठ के बल या दाईं करवट सोने से किसी तरह की परेशानी का ख़तरा नहीं बढ़ता.
फिर भी, ज़्यादातर डॉक्टर पहले ट्राइमेस्टर के बाद पीठ के बल न सोने की सलाह देते हैं. इससे ब्लड सर्कुलेशन पर असर पड़ सकता है, चक्कर या मतली महसूस हो सकती है और पैरों व टख़नों में सूजन बढ़ सकती है.
प्रेगनेंसी में दाईं करवट सोने से क्यों मना किया जाता है?
हो सकता है आपको प्रेगनेंसी में बाईं करवट सोने की सलाह दी गई हो, क्योंकि इससे बच्चे तक ब्लड फ़्लो बेहतर होता है और लिवर व किडनी पर दबाव कम पड़ता है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि दाईं करवट सोना पूरी तरह मना है. 2019 की एक स्टडी में पाया गया कि दाईं करवट सोने से नसों पर दबाव पड़ने का ख़तरा बहुत कम होता है. इसलिए तीसरे ट्राइमेस्टर तक यह सुरक्षित माना जाता है.
“डेटा से पता चलता है कि तीसरे ट्राइमेस्टर तक इस बात से ज़्यादा फ़र्क नहीं पड़ता कि आप किस करवट सोती हैं,” डॉ. Sterling कहती हैं. “सबसे ज़रूरी बात यह है कि आप आराम से सो सकें और आपकी नींद पूरी हो.”
क्या प्रेगनेंसी में मैं पेट के बल सो सकती हूं?
अगर आपको पेट के बल सोने की आदत है, तो करवट लेकर सोने की आदत डालना थोड़ा मुश्किल लग सकता है लेकिन अच्छी बात यह है कि दूसरे ट्राइमेस्टर तक पेट के बल सोना सुरक्षित माना जाता है. उसके बाद बढ़ता हुआ बेबी बंप पेट के बल सोना मुश्किल बना सकता है.
अगर आपको पेट के बल सोने की आदत छोड़ना बहुत मुश्किल लग रहा है, तो ऐसा प्रेगनेंसी पिलो लें जिसमें पेट के लिए जगह बनी हो. इससे आप जब तक आरामदायक महसूस करें, तब तक पेट के बल सोती रह सकती हैं.
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Oura एक्सपर्ट्स के बारे में
Neta Gotlieb, PhD, Oura में वीमेन हेल्थ प्रोडक्ट मैनेजर हैं और पहले लीड क्लिनिकल रिसर्च साइंटिस्ट रह चुकी हैं. वह महिलाओं की हेल्थ पर फ़ोकस करने वाले समाधान विकसित करने और उन पर रिसर्च करने का काम करती हैं. डॉ. Gotlieb ने Tel Aviv University से बायोलॉजिकल साइकोलॉजी में मास्टर्स किया, जहां उन्होंने स्ट्रेस का इम्यून सिस्टम और एंडोक्राइन सिस्टम पर असर समझने पर काम किया. इसके बाद उन्होंने UC Berkeley से PhD की, जहां उन्होंने रिप्रोडक्टिव न्यूरोएंडोक्रिनोलॉजी और सर्केडियन रिदम का मेंस्ट्रुअल साइकल, प्रेगनेंसी और बच्चे के जन्म पर असर समझने के लिए रिसर्च की. उन्हें Women in Tech का ग्लोबल टेक्नोलॉजी लीडरशिप अवॉर्ड और Women of Wearables की तरफ़ से Women’s Health और FemTech में ट्रेलब्लेज़िंग लीडर के सम्मान से नवाज़ा जा चुका है.
Christine Noa Sterling, MD, बोर्ड-सर्टिफ़ाइड ऑब्स्टेट्रिशियन-गायनेकोलॉजिस्ट (OBGYN), तीन बच्चों की मां और Sterling Parents की फ़ाउंडर हैं. Sterling Parents एक ऐसी मेंबरशिप है, जहां आपको हेल्थ से जुड़े सवालों के जवाब, प्रेगनेंसी, डिलीवरी, ब्रेस्टफ़ीडिंग और बच्चे की देखभाल की तैयारी से जुड़ी मदद एक ही जगह मिलती है. साथ ही, यह आपकी अपनी सेहत और आपके अलग पेरेंटिंग स्टाइल पर भी फ़ोकस रखती है.






